मौली – फरिश्ता जैसी मेरी प्यारी बिल्ली की सच्ची कहानी
मौली – मेरी ज़िंदगी की फरिश्ता जैसी बिल्ली 🐾✨
मौली – मेरी ज़िंदगी की फरिश्ता जैसी बिल्ली 🐾✨
ज़िंदगी में कई बार ऐसे लम्हे आते हैं जिनकी उम्मीद भी नहीं होती, और वही हमें सबसे गहराई से छू जाते हैं। मेरे लिए ऐसा ही एक तजुर्बा था मौली से मिलना – एक ऐसी बिल्ली जो सच कहूँ तो मेरी अपनी भी नहीं थी, लेकिन अल्लाह ने उसके ज़रिए मेरे दिल में इतनी मोहब्बत उतार दी कि वो हमेशा के लिए मेरी जिंदगी का एकहिस्सा बन गई।
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पहली मुलाक़ात – जैसे कोई हूर उतर आई हो
वो दिन आज भी मेरी यादों में ताज़ा है।
मेरे घर के पास वाले घर की छत से अचानक एक बिल्ली आई। पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया, लेकिन जब सीढ़ियों से नीचे उतरते हुए उसकी झलक देखी, तो मैं हैरान रह गई।
बर्फ़ जैसी सफ़ेदी बुरराक ,लंबा कद और मुलायम ट्रिपल कोट बाल,नीली आँखें जिनमें आसमान जैसी गहराई थी – वो मुझे किसी परिस्तान की परी सी लगी।
मैं उसे देखती रह गई, मेरे समझ में नहीं आया कि यह क्या है,जैसे कोई स्नो-व्हाइट या जन्नत की हूर मेरे सामने आ खड़ी हो।
मैंने प्यार से बुलाया, मगर वो शरमाई सी, पूँछ हिलाती हुई तुरंत भाग गई। उस लम्हे ने मेरे दिल पर गहरी छाप छोड़ दी। मैं उसके बारे में सोचती ही रह गई |
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एक अनोखा रिश्ता – डर से अपनापन तक का
सच कहूँ तो मुझे जानवरों में कभी कोई दिलचस्पी नहीं थी। लेकिन मौली ने मेरी ये सोच बदल दी।
कुछ दिन बाद जब वो फिर से आई, तो मैंने सीढ़ियों पर चिकन का छोटा टुकड़ा रखा। वो झिझकते हुए पास आई और खाने लगी।
और मैं धीरे धीरे उसको सहलाने लगी मुझे डर भी लग रहा था कही वो काट न ले |
उसकी पहली बार छुई हुई खाल इतनी मुलायम थी कि जैसे रुई की सफ़ेदी पर हाथ फिरा दिया हो। मैं डर भी रही थी कि कहीं काट न ले, मगर उस पल मुझे सिर्फ़ सुकून मिला – दिल को छू जाने वाला सुकून।
अब मैं अक्सर उसके लिया चिकन रखने लगी वो आती और चिकन खाकर भाग जाती |
धीरे-धीरे मौली का आना-जाना बढ़ गया। वो कभी दोपहर में, कभी शाम को आ जाती और मैं उसके लिए चिकन रख देती। मुझे महसूस होता कि जैसे हमारा रिश्ता बहुत पुराना है, शायद सदियों पुराना।
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मौली और उसके राज़ 🐈⬛
एक दिन मैंने गौर किया कि मौली जब भी खाती, तो चिकन का एक टुकड़ा मुंह में दबाकर ले जाती थी। बाद में पता चला कि उसके पाँच छोटे-छोटे बच्चे हैं।
वो माँ होकर अपने बच्चों के लिए खाना छुपा कर ले जाती थी। ये देख कर मेरी मोहब्बत और भी गहरी हो गई।
धीरे-धीरे वो मेरे घर में घूमने लगी, कई-कई घंटे मेरे पास रहती। उसके असली मालिक को भी जब ये बात पता चली तो उन्हें भी तसल्ली थी कि उनकी बिल्ली सुरक्षित जगह पर है। और उन्होंने मौली की मेरे पास रखने की इजाज़त दे दी 😊
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मौली – मेरी रूह का सुकून 🌸
आख़िरकार मौली मेरे घर पर ही रहने लगी। वो सिर्फ़ एक बिल्ली नहीं थी, बल्कि मेरे लिए एक एहसास थी।
जब भी मैं उसे प्यार करती, मुझे ऐसा लगता जैसे कोई खोई हुई चीज़ मुझे फिर से मिल गई हो।
मौली ने मुझे ये एहसास कराया कि जानवर भी अल्लाह की रहमत होते हैं – वो मोहब्बत और सुकून दे सकते हैं, जिसकी हमें उम्मीद भी नहीं होती।
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👉 अगर आपको मेरी मौली की कहानी अच्छी लगी, तो अगला ब्लॉग भी ज़रूर पढ़ें जिसमें मैं उसकी आगे की कहानी आपसे शेयर करूँगी।
धन्यवाद 🙏
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